कौन थे चार साहिबजादे, जिनके बलिदान को युगों-युगों तक याद रखा जाएगा, पढ़ते-पढ़ते आपकी आंखें नम हो उठेंगी, आप कह उठेंगे- निक्कियां जिंदां, वड्डा साका
निक्कियां जिंदां, वड्डा साका। इसका अर्थ है छोटी सी उम्र और सर्वोच्च बलिदान। जो उम्र खेलने की होती है, उस उम्र में गुरु गोबिन्द सिंह के चारों बेटों ने धर्म की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। जब छोटे साहिबजादों को जिंदा दीवार में चुनवाने का आदेश हुआ तो दोनों साहिबजादे घबराए नहीं। वजीर खां की आंखों में आंखें डालकर कह दिया था- हम अकाल पुरख और गुरु पिता के अलावा किसी के सामने सिर नहीं झुकाते। दिसंबर का एक सप्ताह चारों साहिबजादों के बलिदान को याद करके मनाया जाता है। PehlaPanna पर चारों साहिबजादों के शौर्य से भरे जीवन को जानिये।
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कौन थे चार साहिबजादे, जिनके बलिदान को युगों-युगों तक याद रखा जाएगा, पढ़ते-पढ़ते आपकी आंखें नम हो उठेंगी, आप कह उठेंगे- निक्कियां जिंदां, वड्डा साका