कौन थे चार साहिबजादे, जिनके बलिदान को युगों-युगों तक याद रखा जाएगा, आप कह उठेंगे- निक्कियां जिंदां, वड्डा साका
निक्कियां जिंदां, वड्डा साका। इसका अर्थ है छोटी सी उम्र और सर्वोच्च बलिदान। जब छोटे साहिबजादों को जिंदा दीवार में चुनवाने का आदेश हुआ तो दोनों साहिबजादे घबराए नहीं। दिसंबर का एक सप्ताह चारों साहिबजादों के बलिदान को याद करके मनाया जाता है। PehlaPanna पर चारों साहिबजादों के शौर्य से भरे जीवन को जानिये।
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कौन थे चार साहिबजादे, पढ़ते-पढ़ते आपकी आंखें नम हो उठेंगी, आप कह उठेंगे- निक्कियां जिंदां, वड्डा साका
Updated AtThursday, December 04, 2025 at 1:23 PM
