विशेष आलेख - डॉ.गौरव श्रीवास्तव। कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में जो हुआ, वो निर्भया जैसा ही था। कभी दिल्ली तो कभी कोलकाता तो कभी कोई और राज्य। बेटियों के सशक्तीकरण के नारे लगाने और उन्हें निर्भय कह देने मात्र से हम बेटियों को निर्भय नहीं बना सकते। एक न्याय युद्ध तो छेड़ना ही होगा। कैसा हो ये महाभारत, ये विवेचना और चिंतन तो समाज को करना है।

PehlaPanna बात दिल की : कहने भर से निर्भय नहीं होंगी बेटियां, कभी दिल्ली तो कभी कोलकाता होते रहेंगे, न्याय का एक महाभारत तो छेड़ना ही होगा
Updated AtSunday, August 18, 2024 at 1:37 AM